कात्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शंकर ने त्रिपुरासुर दैत्य का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलायी जिसके फलस्वरूप देवगण इस दिन भगवान शंकर की नगरी काशी में एकत्रित होकर गंगा मैय्या में असंख्य दीपदान कर भगवान भोलेनाथ के प्रति कृतज्ञता प्रगट की, तब से देव दीपावली के रूप में यह पर्व मनाया जाता है। साथ ही भगवान शंकर द्वारा चार माह की योग निद्रा से जगने पर भगवान विष्णु को बैकुण्ठ चतुर्दशी को पुनः जगत संचालन का दायित्व सौंपा गया, उस खुशी में देवताओं का मनाया गया उत्सव है देव दीपावली । हमारी संस्था प्रत्येक वर्ष देव दीपावली का उत्सव बड़े ही धूम धाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाती है।